अब तो उलटना नकाब होगा

दिसम्बर 18, 2008

 

 

 

अब तो उलटना नकाब होगा

 

अब तो उलटना नकाब होगा
जुर्मों का उनके हिसाब होगा

हमारा खूने-जिगर कब तलक
उन्हीं का जामे-शराब होगा

जिन्होनें छीनी हमारी रोटी
अब उनका खा़ना ख़राब होगा

कुदाल-खुरपी औ’ फावडा-हल
अब नूर होगा शबाब होगा

चुएगी गंगा हमारे सिर से
सारा पसीना गुलाब होगा            ६२

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: